Skip to main content

भूमि आर्यों की

यह भूमि आर्यों की
यह भूमि भारत की
 जन जन का जहाँ हो  कल्याण।
 मानव जीवन का  हो जहाँ उत्थान।
यह भूमि आर्यों की
यह भूमि भारत की
 भौतिक से पहले हो जहाँ अंतधर्यान।

खुद से पहले अतिथि का रखते हैं जहाँ ध्यान।
यह भूमि आर्यों की
यह भूमि भारत की
अतिथि देवो भवः
और
ऊँ सर्वे भवन्तु सुखिनः 
 मूलमंत्र है जिसकी संस्कृति की पहचान।
यह भूमि आर्यों की
यह भूमि भारत की
जहाँ ज्ञान की बहती निश्चल धारा।
जहाँ हरपल अँधियारे मिटाते अमर अजर वेद पुराण।
यह भूमि आर्यों की।
यह भूमि भारत की।
जहाँ जन्मे  दयानंद और हंसराज से रत्न महान।
यह भूमि आर्यों की
यह भूमि भारत की
जहाँ सदियों से ऋषि मुनियों ने ध्यान और योग अपनाया।
 तन मन का किया योग से श्रेष्ठ निर्माण
 जिसे माने आज विज्ञान।
यह भूमि आर्यों की
यह भूमि भारत की
जहाँ यज्ञ,ध्यान और योग का नित डी. ए.वी. देते ज्ञान
जहाँ 'स्वस्थ हो भारत का' हर डी.ए.वी. में नित बजता है आलाप।
पूर्व हो या पश्चिम 
उत्तर हो या दक्षिण
अब हर और योग है छाया।
आर्यों की यह है पहचान।
विश्वपटल पर योग का है परचम लहराया।
तो आओ मिलकर सुबह शाम करे हम योग।
योग जो काबू में करना सिखाए लोभ,लालच और क्रोध।
योग जो रखे ना केवल तन बल्कि मन भी स्वस्थ
जो सुस्ती को करें पल में ध्वस्त।
जो धूमिल आँखों में भी भर दे जान।
जो आशा का दीप जलाए हर क्षण।
तो आओ बच्चे,बूढ़े और जवान मिलकर सुबह शाम करे हम योग।
योग है भारत भूमि को ऋषि मुनियों का जीवनदायिनी वरदान।
तो आओ मिलकर सुबह शाम नियम से करें योग।
क्योंकि बस अब तन मन से बस योग रखेगा निरोग।

Comments

Post a Comment

Do leave your comments